भारतवर्ष का नाम भारत किस प्रकार पड़ा? How did India get the name Bharat?


भारतवर्ष का नाम भारत किस प्रकार पड़ा? How did India get the name Bharat?

शुरुवात से अंत तक जरूर पढ़ें।


परिचय:

भारतवर्ष, जिसे आज हम भारत (India) के नाम से जानते हैं, एक अत्यंत प्राचीन राष्ट्र है जिसकी जड़ें हजारों वर्षों पूर्व वैदिक काल में जाती हैं। इस विशाल भूखण्ड को “भारत” नाम कैसे मिला, यह प्रश्न न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक, पौराणिक, सामाजिक और भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में भी अत्यंत रोचक है।

“भारत” शब्द केवल एक नाम नहीं है, बल्कि यह उस गौरवशाली सभ्यता का प्रतीक है जिसने वेदों, उपनिषदों, महाकाव्यों, शास्त्रों, धर्म, दर्शन, विज्ञान, गणित, खगोलशास्त्र आदि क्षेत्रों में संपूर्ण विश्व को ज्ञान प्रदान किया। भारत का नामकरण किस आधार पर हुआ — यह जानना हमारी ऐतिहासिक चेतना और सांस्कृतिक समझ को समृद्ध करता है।


‘भारत’ नाम की उत्पत्ति के स्रोत:

“भारत” नाम की उत्पत्ति से जुड़े प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं:


1. पौराणिक स्रोत: राजा भरत से संबंध

(क) ऋषभदेव और भरत – भागवत पुराण का वर्णन
श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार, भारतवर्ष का नामकरण राजा भरत के नाम पर हुआ।
भरत, ऋषभदेव के ज्येष्ठ पुत्र थे। ऋषभदेव को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर के रूप में भी जाना जाता है। जब ऋषभदेव ने संन्यास लिया, तब उन्होंने अपना राज्य भरत को सौंप दिया। भरत एक धर्मपरायण, न्यायप्रिय और प्रजावत्सल राजा थे। उन्होंने सम्पूर्ण भूमि पर विजय प्राप्त की और अपने पराक्रम से उसे एकीकृत किया।

श्रीमद्भागवत महापुराण (5.7.3) में लिखा है:

“एतेनैव भारतं वर्षं भारत इति संज्ञां लभते”

अर्थात्, “इस भूखंड को भारत नाम राजा भरत के कारण मिला।”

(ख) रामायण में उल्लेख
वाल्मीकि रामायण में अयोध्या के राजा दशरथ के चार पुत्रों में से एक थे भरत, लेकिन उनके नाम पर भारतवर्ष नहीं कहलाता, क्योंकि उससे पहले ही भारत नाम प्रचलन में आ चुका था।


2. ऐतिहासिक स्रोत: भारत जन और जनपद

(क) वैदिक काल का ‘भारत जन’
ऋग्वेद में “भारत” एक जनजाति (tribe) के रूप में वर्णित है। यह जन अत्यंत शक्तिशाली और सभ्य मानी जाती थी। ऋग्वेद के सप्त-सिंधु प्रदेश में भारत जन निवास करते थे और इन्होंने दस राजाओं के साथ प्रसिद्ध युद्ध — “दशराज्ञ युद्ध” — लड़ा था।

ऋग्वेद (7.83.1) में वर्णन मिलता है कि:

“त्वमिन्द्र श्रवसा भारतं जनं त्वं वीर श्रवसा पौंरं जनं…”

यह उल्लेख भारत जन की वीरता और प्रतिष्ठा को दर्शाता है। यह जनजाति बाद में इतने प्रसिद्ध हो गई कि इस जन की भूमि को “भारतवर्ष” कहा जाने लगा।

(ख) जन से जनपद और राष्ट्र का निर्माण
जब भारत जन (tribe) एक स्थायी भूभाग में बस गए और एक राजनीतिक इकाई के रूप में विकसित हुए, तो उनका क्षेत्र भारत जनपद कहलाया और धीरे-धीरे संपूर्ण उपमहाद्वीप को “भारतवर्ष” के रूप में जाना जाने लगा।


3. महाभारत में ‘भारत’ नाम का प्रयोग

(क) भरत वंश और कुरु वंश
महाभारत में जिस वंश की कथा कही गई है, उसे भारतवंश कहा गया है। यह वंश राजा भरत से उत्पन्न हुआ था। कुरु, पांडु, धृतराष्ट्र, अर्जुन, कृष्ण आदि सभी इसी वंश से थे।

(ख) ‘भारत’ नाम की कई बार पुनरावृत्ति
महाभारत के लगभग सभी श्लोकों में अर्जुन को ‘भारत’, ‘भारतसुत’, ‘भारतवंशी’ जैसे नामों से संबोधित किया गया है।

उदाहरण:

“धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय।।”

इस श्लोक के संदर्भ में ‘कुरुक्षेत्र’ को भारत भूमि का प्रतीक माना जाता है, और ‘भारत’ शब्द का उल्लेख संवादों में बार-बार होता है।


4. पुराणों में भारतवर्ष का वर्णन

पुराणों में ‘जम्बूद्वीप’ का विवरण है, जो नौ खंडों में विभाजित था। इन नौ खंडों में भारतवर्ष प्रमुख था।

विष्णु पुराण में उल्लेख है:

“उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र संततिः।।”

इसका अर्थ है — “समुद्र के उत्तर और हिमालय के दक्षिण में जो भूमि है, वह भारतवर्ष है, जहाँ की संतानें ‘भारती’ कहलाती हैं।”

यह श्लोक दर्शाता है कि ‘भारतवर्ष’ शब्द का प्रयोग एक भौगोलिक, सांस्कृतिक और जातीय पहचान के रूप में होता था।


5. भारतवर्ष की सांस्कृतिक पहचान

(क) ‘भारत’ केवल भूगोल नहीं, विचार है
‘भारत’ केवल एक भूमि नहीं बल्कि एक संस्कृति, एक विचारधारा, एक परंपरा है — जो धर्म, अध्यात्म, ज्ञान, कला और दर्शन से परिपूर्ण है। वैदिक ऋषियों, उपनिषदों के मनीषियों, जैन तीर्थंकरों, बौद्ध भिक्षुओं, और गुरुकुल परंपरा ने इस भारतभूमि को महान बनाया।

(ख) ‘भारत माता’ का रूप
19वीं सदी में स्वतंत्रता संग्राम के समय भारत को ‘भारत माता’ का रूप दिया गया। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का “वंदे मातरम्” गीत और अभनिंद्रनाथ टैगोर की भारत माता की चित्रकला ने भारत को देवीस्वरूप मानकर उसके नाम को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ दिया।


6. संवैधानिक मान्यता

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1(1) में स्पष्ट लिखा गया है:

“India, that is Bharat, shall be a Union of States.”
अर्थात् — “इंडिया अर्थात् भारत, राज्यो का एक संघ होगा।”

इससे स्पष्ट होता है कि ‘भारत’ हमारे देश का आधिकारिक और मान्य नाम है। यह नाम भारतीय संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक विरासत को दर्शाता है।


7. भारत शब्द से जुड़े अन्य नाम:

भारत को विभिन्न स्रोतों में अन्य नामों से भी जाना गया है:

  • जम्बूद्वीप – पुराणों में
  • आर्यावर्त – वैदिक काल में, जहाँ आर्य बसे
  • हिंदुस्थान / हिंद – फारसी/अरबी स्रोतों में
  • इंडिया – यूनानी और अंग्रेजी स्रोतों में, सिंधु नदी से व्युत्पन्न

परंतु इन सभी नामों में ‘भारत’ वह नाम है जो स्वदेशीय, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का प्रतिनिधित्व करता है।


8. आधुनिक भारत में ‘भारत’ नाम का महत्व

आज भी ‘भारत’ नाम का उपयोग निम्न प्रकार से होता है:

  • भारत सरकार (Government of Bharat)
  • भारतीय नागरिक (Bharatiya)
  • भारतीय सेना, भारतीय रेल, भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय संसद
  • भारतीय संविधान, भारतीय संस्कृति, भारतीय दर्शन आदि

‘भारत’ शब्द आज प्रत्येक भारतीय की पहचान बन चुका है।


निष्कर्ष:

‘भारत’ नाम की उत्पत्ति पौराणिक, वैदिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्रोतों से जुड़ी हुई है। राजा भरत, भारत जन, और भारतवंश जैसे स्रोतों से यह स्पष्ट होता है कि यह नाम कालांतर में एक जनपद, फिर भूभाग, फिर एक राष्ट्र के रूप में विकसित हुआ। ‘भारत’ न केवल एक भूगोल है, बल्कि एक जीवंत परंपरा, विचार, संस्कृति और आत्मा है।

भारत का नाम उसकी अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा, और वैज्ञानिक उन्नति का प्रतीक बन चुका है। यह वह भूमि है जहाँ बुद्ध, महावीर, विवेकानंद, गांधी जैसे महान व्यक्तित्वों ने जन्म लिया। इस प्रकार ‘भारत’ नाम केवल ऐतिहासिक संज्ञा नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन है, जो आज भी प्रत्येक भारतीय के हृदय में जीवित है।


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