प्रागैतिहास एवं आद्य इतिहास में अंतर Difference between prehistory and protohistory
शुरुवात से अंत तक जरूर पढ़ें।
1. प्रस्तावना
मानव इतिहास का अध्ययन करने के लिए इतिहासकारों ने समय को विभिन्न कालखंडों में विभाजित किया है। इनमें दो प्रमुख चरण हैं – प्रागैतिहास (Prehistory) और आद्य इतिहास (Protohistory)।
- प्रागैतिहास उस काल को कहा जाता है जब मानव ने लिखने की कला विकसित नहीं की थी। इस समय की जानकारी हमें पुरातात्विक अवशेषों (जैसे पत्थर के औजार, गुफा चित्र, हड्डियाँ, बर्तन आदि) से मिलती है।
- आद्य इतिहास उस समय को कहा जाता है जब मानव ने लिपि का उपयोग शुरू कर दिया था, लेकिन हमें उन लिपियों को पढ़ना नहीं आता या उनके लिखित अभिलेख आंशिक रूप से समझ में आते हैं।
इस लेख में हम प्रागैतिहास और आद्य इतिहास दोनों को विस्तार से समझेंगे और उनके बीच का अंतर बताएंगे।
2. प्रागैतिहास का अर्थ और विशेषताएँ
प्रागैतिहास (Prehistory) वह समय है जब मानव के पास कोई लिखित भाषा या लिपि नहीं थी। इस काल की जानकारी हमें केवल पुरातत्वीय स्रोतों और नृविज्ञानिक अवशेषों से मिलती है।
प्रागैतिहास के प्रमुख चरण
वैज्ञानिकों ने प्रागैतिहास को औजारों और धातुओं के उपयोग के आधार पर तीन मुख्य कालखंडों में विभाजित किया है:
(क) पाषाण युग (Stone Age):
- पुरापाषाण युग (Palaeolithic Age):
- यह काल लगभग 25 लाख वर्ष पूर्व से 10,000 ई.पू. तक माना जाता है।
- लोग शिकार और भोजन संग्रह पर निर्भर थे।
- गुफाओं में रहते थे और गुफाओं की दीवारों पर चित्र बनाते थे।
उदाहरण: भीमबेटका (मध्य प्रदेश) की गुफाएँ।
- मध्य पाषाण युग (Mesolithic Age):
- लगभग 10,000 ई.पू. से 8,000 ई.पू.
- छोटे औजार (माइक्रोलिथ) और अर्ध-घुमंतू जीवन।
- पशुपालन और आंशिक कृषि की शुरुआत।
- नवपाषाण युग (Neolithic Age):
- लगभग 8,000 ई.पू. से 4,000 ई.पू.
- कृषि, मवेशी पालन, मिट्टी के बर्तनों और स्थायी निवास का आरंभ।
उदाहरण: मेहरगढ़ (पाकिस्तान), बुरज़ाहोम (कश्मीर)।
(ख) धातु युग (Metal Age):
- ताम्रपाषाण युग (Chalcolithic Age):
- तांबे और पत्थर दोनों के औजार।
- ग्राम्य जीवन और कृषि का विकास।
उदाहरण: इनामगाँव (महाराष्ट्र), आहर (राजस्थान)।
- कांस्य युग (Bronze Age):
- तांबा और टिन मिलाकर कांस्य का उपयोग।
- नगरीकरण की शुरुआत।
उदाहरण: सिंधु घाटी सभ्यता।
3. आद्य इतिहास का अर्थ और विशेषताएँ
आद्य इतिहास (Protohistory) वह काल है जब मानव ने लिपि का ज्ञान प्राप्त कर लिया था, लेकिन आज के समय में इतिहासकारों को उस लिपि को पूरी तरह पढ़ना नहीं आता या वह आंशिक रूप से समझी जाती है।
आद्य इतिहास की प्रमुख विशेषताएँ:
- लेखन की शुरुआत हो चुकी थी।
- कृषि, व्यापार, नगर नियोजन, कला और स्थापत्य का विकास।
- शासन व्यवस्था, धर्म और सामाजिक संगठन स्पष्ट रूप से विकसित हुए।
- परंतु उस काल की लिपि (जैसे सिंधु लिपि) अभी तक पूरी तरह पढ़ी नहीं जा सकी है।
उदाहरण:
– सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) 2500 ई.पू. से 1500 ई.पू. के बीच आद्य इतिहास का प्रमुख उदाहरण है।
– यहाँ की लिपि आज भी पूरी तरह पढ़ी नहीं जा सकी है।
– यह काल पाषाण और धातु युग के बीच का संक्रमण काल है।
4. प्रागैतिहास और आद्य इतिहास के स्रोत
(क) प्रागैतिहास के स्रोत:
- पत्थर और धातु के औजार।
- गुफा चित्र (भीमबेटका)।
- अस्थियाँ और दफनाने की जगह।
- पुरातात्विक खुदाई से मिले हड्डियों, लकड़ी, बीजों, राख आदि के नमूने।
(ख) आद्य इतिहास के स्रोत:
- पक्की ईंटों के मकान, नगर नियोजन (मोहनजोदड़ो)।
- मुहरें, मूर्तियाँ, लिपि और चित्रलिपि।
- धातु के औजार, व्यापारिक वस्तुएँ।
- जल निकासी व्यवस्था, अनाज भंडार।
5. प्रागैतिहास और आद्य इतिहास के बीच मुख्य अंतर (तालिका रूप में):
| क्रम | प्रागैतिहास (Prehistory) | आद्य इतिहास (Protohistory) |
|---|---|---|
| 1 | लेखन प्रणाली का अभाव। | लेखन प्रणाली का उदय, पर लिपि पूरी तरह पढ़ी नहीं जा सकी। |
| 2 | जानकारी केवल पुरातात्विक अवशेषों से मिलती है। | जानकारी पुरातात्विक और आंशिक साहित्यिक स्रोतों से। |
| 3 | जीवनशैली – शिकार, भोजन संग्रह, आरंभिक कृषि। | कृषि, व्यापार, शहरीकरण, नगर नियोजन का विकास। |
| 4 | संस्कृति और सभ्यता का आरंभिक स्वरूप। | विकसित सभ्यता का उदय। |
| 5 | औजार मुख्यतः पत्थर के। | धातुओं (तांबा, कांसा) और पत्थरों का मिश्रित प्रयोग। |
| 6 | कोई जटिल प्रशासन या राज्य व्यवस्था नहीं। | शासन प्रणाली और सामाजिक संगठन का विकास। |
| 7 | उदाहरण – भीमबेटका, मेहरगढ़। | उदाहरण – सिंधु घाटी सभ्यता। |
6. प्रागैतिहास की जीवनशैली का विवरण
प्रागैतिहासिक काल में लोग घुमंतू जीवन जीते थे। वे गुफाओं या झोपड़ियों में रहते थे।
- भोजन: शिकार, जंगली फल, जड़ें और पशु।
- औजार: पत्थर, हड्डी, लकड़ी।
- कला: गुफा चित्र, जैसे भीमबेटका के चित्र।
- धर्म: प्रकृति पूजन।
7. आद्य इतिहास की जीवनशैली
आद्य ऐतिहासिक काल में लोग ग्राम्य और शहरी जीवन जीने लगे।
- भोजन: कृषि, पशुपालन, व्यापार।
- औजार: धातु (कांसा, तांबा)।
- कला: मूर्तिकला, मुहरें, नृत्यांगना की कांस्य मूर्ति।
- धर्म: माता देवी, पशुपति महादेव की पूजा।
8. सिंधु घाटी सभ्यता – आद्य इतिहास का श्रेष्ठ उदाहरण
सिंधु घाटी सभ्यता आद्य इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण खोज है।
- प्रमुख नगर: हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल, कालीबंगन।
- विशेषताएँ:
- पक्की ईंटों के घर।
- जल निकासी व्यवस्था।
- अनाज भंडार।
- व्यापार – मुहरें, मणि-मुक्ता।
- लिपि – आज तक अपठनीय।
9. प्रागैतिहास से आद्य इतिहास तक का संक्रमण
प्रागैतिहास के अंतिम चरण (नवपाषाण और ताम्रपाषाण) में मानव ने स्थायी जीवन अपनाया। धीरे-धीरे:
- कृषि विकसित हुई।
- व्यापार शुरू हुआ।
- धातुओं का प्रयोग बढ़ा।
- नगर और सभ्यता का निर्माण हुआ।
यही प्रक्रिया सिंधु घाटी सभ्यता तक पहुंची, जिसे आद्य इतिहास कहा जाता है।
10. प्रागैतिहास और आद्य इतिहास के महत्व
- यह हमें बताता है कि मानव सभ्यता कैसे विकसित हुई।
- पुरातत्वीय साक्ष्यों से हमें उस समय की तकनीक, कला और सामाजिक जीवन की जानकारी मिलती है।
- आद्य इतिहास से हमें सभ्यता और नगरीकरण के आरंभिक स्वरूप का ज्ञान होता है।
11. निष्कर्ष
प्रागैतिहास और आद्य इतिहास दोनों मानव सभ्यता के प्रारंभिक चरणों को दर्शाते हैं। प्रागैतिहास हमें यह दिखाता है कि मानव ने प्रकृति के साथ संघर्ष करते हुए कैसे जीवन की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना सीखा, जबकि आद्य इतिहास उस समय को दर्शाता है जब मानव ने संस्कृति, लिपि, कला और नगरीकरण की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया।
आज भी प्रागैतिहासिक गुफा चित्र और आद्य इतिहास की महान सभ्यताएँ (जैसे सिंधु घाटी) हमारे गौरवशाली अतीत की गवाही देती हैं।